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कम्प्युटर वायरस क्या होता है और इससे सुरक्षित कैसे रहें?

Virus का नाम सुनते ही डर का आभास होने लगता हैं. क्योंकि वायरस एक खतरनाक एवं डरावना जीव ही हैं. और इसकी प्रकृति हम इंसान को नुकसान पहुँचाने की ही होती हैं.

आपने भी कभी-न-कभी वायरस  के बारे में जरूर सुना होगा. कई बार समाचार पत्रों, टीवी, रेडियों ऑनलाईन विडियों आदि के माध्यम से भी वायरस अटैक या वायरस से होने वाली क्षति के बारे में भी खबरे सुनी एवं देखी होगी.  

आज कंप्यूटर का चलन सामान्य हो गया है तथा अधिकतर कार्य इलेक्ट्रॉनिक स्मार्ट डिवाईसेस के द्वारा सपन्न होने लगे हैं. गैजेट की अति निर्भरता के कारण जहाँ हमे सुलभता मिली है. वहीं दूसरी तरफ अंजाने खतरे भी दिन पे दिन बढ रहे हैं.

और ऐसा ही एक खतरा है होता हैं कम्प्युटर वायरस.

What is Computer Virus in Hindi Kya Hai
कम्प्युटर वायरस क्या हैं?

डिजिटल संसार मे कंप्यूटर वायरस एक गंभीर खतरा बन चुका है. जिस वजह से किसी भी कंप्यूटर यूज़र को यह जानना जरूरी हो जाता है कि वायरस क्या है (What is Virus in Hindi)? वायरस कैसे किसी डिवाइस में पहुँचकर उस डिवाईस को क्षति (डैमेज) पहुचाँने का कार्य करता है? तथा हम इस कंप्यूटर वायरस से कैसे बच सकते हैं?


कम्प्युटर वायरस क्या हैं – What is Computer Virus in Hindi?

कम्प्युटर वायरस की परिभाषा की बात करें तो “वायरस” एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक कोड होता है. जिस कोड का उपयोग कम्प्युटर में उपस्थित सूचनाओं को नष्ट करने (Corrupt), प्राप्त करने के लिए किया जाता हैं.

VIRUS की फूल फॉर्म Vital Information Resources Code होती हैं. यह एक सूक्ष्म कम्प्युटर प्रोग्राम होता हैं. जो किसी भी कम्प्युटर में प्रवेश कर उस डिवाईस की कार्य-प्रणाली में बाधा उत्पन्न करते हैं. यह एक Auto-Exchange प्रोग्राम होता हैं.

सामान्यत: कम्प्युटर वायरस कम्प्युटर की हार्ड डिस्क के बूट सेक्टर में पहुँचकर हार्ड डिस्क की गति को धीमा करता हैं. जिससे कम्प्युटर प्रोग्राम बंद या कार्य-प्रणाली ठप्प हो सकती हैं.

एक कम्प्युटर वायरस धीरे-धीरे युजर के डिवाइस की मेमोरी मे फैल कर डिवाइस को क्षतिग्रस्त करता हैं. जिस कारण एक बार वायरस फैल जाने पर नष्ट डाटा को रिकवर करना काफी मुश्किल हो जाता हैं.


अब सवाल आता है कि कम्प्युटर वायरस कैसे काम करता हैं?   

एक उदाहरण की सहायता से समझे तो आपको कंप्यूटर में MS Word, Spreadsheet Program, Presentation Program आदि एप्लीकेशन के द्वारा दस्तावेज बनाने के लिए कीबोर्ड की सहायता से अक्षर टाईप करने पडते हैं. तथा इन्हें प्रिंट करने के लिए प्रिंट कमांड देनी होती है. अर्थात यह एपलिकेशन हमारे द्वारा कंप्यूटर को दी गयी कमांड पर कार्य करते हैं.

लेकिन वहीं दूसरी तरफ एक Clock होती है जिसका कार्य समय डिस्प्ले करना होता है. लेकिन हमें इसे Run करने के लिए किसी कमांड  या प्रोग्राम की आवश्यकता नहीं होती. तथा यह 24 घंटे हमारे कंप्यूटर में कार्य करती है. जिस कारण हमें बार-बार टाइम सेट करने की आवश्यकता नहीं पड़ती.

Computer Clock में इस तरह प्रोग्रामिंग की जाती है कि ये प्रोग्राम Install या Open हुए बगैर अपना कार्य करते रहते हैं. इस तरह के प्रोग्राम को By Default Programs कहा जा सकता है. उसी तरह By Default प्रोग्राम की तरह ही वायरस में इस प्रकार के कोड़ होते हैं जिनसे हमारे कंप्यूटर को बंद किया जा सके, फाइल्स को डिलीट किया जा सके, तथा कंप्यूटर लॉक किया जा सके, कंप्यूटर की डाटा स्पीड स्लो कर देना, Files स्वतः एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर कर देना आदि अन्य कमांड कंप्यूटर वायरस के भीतर प्रोग्राम की जाती है. जिससे कंप्यूटर को काफी नुकसान पहुँचता है.


कम्प्युटर वायरस कौन बनाता हैं?

सरल शब्दों में कहें तो यह वे लोग होते हैं जिन्हें कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में महारथ हासिल होती है. अर्थात वह कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में एक्सपर्ट होते हैं लेकिन टेक्नोलॉजी से जुड़ी इस दुनिया में अपराध करने, भय फैलाने अथवा दूसरों का नुकसान करने आदि उद्देश्य से यह कंप्यूटर वायरस का निर्माण करते हैं. इन लोगों को हैकर्स भी कहा जा सकता है.


कम्प्युटर वायरस हमारे कम्प्युटर तथा डिवाईसों तक कैसे पहुँचता हैं?

आज पूरी दुनिया विश्व नेटवर्क यानी इंटरनेट की वजह से आपस में जुड़ा हुआ है. इंटरनेट भी एक नेटवर्क है. तथा नेटवर्क से कंप्यूटर में वायरस पहुँचता है.

जब कोई उपयोगकर्ता कंप्यूटर में इंटरनेट ब्राउज करता है. वायरस युक्त किसी Unknown वेबसाइट या लिंक पर क्लिक करता है तो डिवाइस में भी वायरस पहुंच जाता है. इसके अलावा ऑफलाइन तरीके की बात करें तो CD, फ्लॉपी डिस्क तथा पेनड्राइव आदि की मदद से कंप्यूटर वायरस एक कंप्यूटर से दूसरे डिवाइस में फैल सकता है.

हालांकि वर्तमान समय में फ्लॉपी डिस्क या फ्लॉपी ड्राइव का उपयोग कम किया जाता है. परन्तु पेन ड्राइव का इस्तेमाल Windows Installation, फ़ाइल ट्रांसफर, स्टोरेज डिवाइस आदि अनेक कार्यों के लिए किया जाता है. Pen Drive के इस्तेमाल से वायरस एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में आसानी से पहुँच सकता है.

यदि किन्हीं कारणों से किसी Pen Drive में वायरस प्रवेश करता है तथा भविष्य में यदि हम उस उस पेनड्राइव को किसी भी कंप्यूटर डिवाइस, मोबाइल (OTG Cable के द्वारा)  से कनेक्ट कर फाइल ट्रांसफर करते हैं, तो दूसरे डिवाइस में भी वायरस आने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं.

इंटरनेट के माध्यम से सॉफ्टवेयर, प्रोग्राम्स डाउनलोड करना, पॉर्न साईट पर पॉर्न फिल्मे देखना, अंजाने लिंक विजिट करना, ईमेल अटैचमेंट्स, लुभावने ग्राफिक्स से जुडकर वायरस हमारे डिवाईस में प्रवेश कर स्थापित हो सकता हैं. और दीमक की भांति अंदर ही अंदर डिवाईस मेमोरी में स्टोर डाटा को नुकसान पहुँचा सकता हैं.


कुछ लोकप्रिय कम्प्युटर वायरस के नाम

मैक मैग

मेक जैसा कि नाम से ही पता लगता है यह Mac सिस्टम के लिए कार्य करता था. यह एप्प्ल मैकिटॉश कंप्यूटरों के लिए कार्य करता था. यह आमतौर पर शांति संदेश देकर समाप्त हो जाता था. इस वायरस का आविष्कार रिचर्ड ब्रांडों द्वारा 1988 में किया गया तथा उस समय वह Mac Mag कंप्यूटर मैगजीन में संपादक तथा पब्लिशर के रूप में कार्य कर रहे थे. यह एक बूट सेक्टर वायरस था जो हाइपर स्टैक  “एप्पल के नए उत्पाद”  में फैलता था.

जेरुसलम वायरस

जेरूसलम वायरस को 1987 अक्टूबर में पहचाना गया. यह एक Dos वायरस था. यह पहली बार जेरूसलम के एक विश्वविद्यालय में पाया गया जिस कारण इसका नाम जेरूसलम वायरस रखा गया.

माइकल एंजेलो

इस वायरस को पहली बार 4 फरवरी 1991 में ऑस्ट्रेलिया में देखा गया. इस वायरस को डोज सिस्टम को बर्बाद करने के लिए तैयार किया गया था. सभी बूट सेक्टर वायरस की ही तरह माइक्रो एंजेलो वायरस को BIOS लेवल पर ऑपरेट किया जाता था.

यह अन्य वायरस के मुकाबले इसलिए भी भिन्न था क्योंकि यह यह कंप्यूटर वायरस के इतिहास में सबसे बड़ा चर्चित वायरस था. यह वायरस 6 मार्च जो कि माइकल एंजेलो वायरस की “जन्म तिथि” है उस दिन डाटा को समाप्त करता है. परंतु बाद में इस तरह के वायरस को नष्ट करने के लिए एंटीवायरस का निर्माण किया गया जो इस तरह वायरस को खत्म करने में सक्षम हों.

सी ब्रैन

यह कंप्यूटर वायरस जनवरी 1988 में पहली बार देखा गया. इसे दुनिया का सबसे पहला MS-DOS कंप्यूटर वायरस माना गया. तथा इसका निर्माण दो पाकिस्तानी भाइयों अमजद तथा बासित नामक दो लोगों ने किया था. जो उस समय लाहौर में निवास कर रहे थे. यह एक बूट सेक्टर वायरस था जिसने कई कंप्यूटर्स को नुकसान पहुँचाया.


कम्प्युटर वायरस से कम्प्युटर को कैसे सुरक्षित रखें?  

कम्प्युटर वायरस से सुरक्षित रहने का सबसे उत्तम तरीका है एंटी-वायरस प्रोग्राम इस्तेमाल करना. तथा साथ ही कुछ डिजिटली आचरणों को अपनाकर डिवाईसों के साथ इंटरैक्ट करना.

आज बाज़ार में कई प्रकार के एन्टी-वायरस उपलब्ध हैं. जिन्हें हम सालाना निश्चित राशि खर्च कर या मुफ्त में इनस्टॉल कर अपने कंप्यूटर को सुरक्षित रख सकते हैं. हालाँकि एक Paid Antivirus मुफ्त एंटीवायरस से ज्यादा सुरक्षित तथा बेहतर होता हैं. जिन्हें आप ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं, क्योंकि Paid Antivirus कंप्यूटर को पूर्ण रूप से सुरक्षित रखने में दक्ष होते हैं. कुछ मुख्य एंटीवायरस के नाम निम्नलिखित हैं.

नोट:- यह सभी Antivirus फ्री तथा सशुल्क दोनों श्रेणीयों में उपलब्ध हैं तथा इन सभी मुख्य एंटीवायरस का उपयोग यूज़र्स द्वारा दुनिया भर में कंप्यूटर को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है.

  • Bit Defender
  • Avast Antivirus
  • Malware Bytes
  • AVG Antivirus
  • Norton
  • McAfee Antivirus

Antivirus कैसे काम करता हैं?

मुख्यतः सभी वायरस अज्ञात स्रोतों से कंप्यूटर में प्रवेश करते हैं. Antivirus Program को इस तरह से प्रोग्राम्ड किया जाता है. इसे कम्प्युटर में स्थापित यानी इन्स्टॉल करने के बाद यह सभी अज्ञात वेबसाईट, एपलिकेशन आदि की निगरानी रखता है तथा किसी भी अंजानी फ़ाइल, या प्रोग्राम को कंप्यूटर में इनस्टॉल होने से रोकता हैं.

यदि आपके कंप्यूटर में भी कोई एंटीवायरस मौजूद है तो संभवतः आपने कभी देखा होगा कि आपके कंप्यूटर में आपकी कुछ जरूरी फाइल्स होती हैं. परन्तु वह फाईल्स कंप्यूटर से आटोमेटिक डिलीट हो जाती हैं. दरअसल वह फ़ाइल अज्ञात स्रोतों में उपलब्ध होती है. तो सिस्टम की सुरक्षा के लिए Antivirus उन फाइल्स को ऑटोमैटिक डिलीट कर देता है. अधिकतर इस तरह के मामले फ्री एंटीवायरस में सामने आते हैं.


आपने क्या सीखा?

इस लेसन में हमने आपको कम्प्युटर वायरस के बारे में पूरी जानकारी दी हैं. आपने जाना कि कम्प्युटर वायरस क्या होता हैं? यह कैसे हमारे कम्प्युटर को नुकसान पहुँचाता हैं? तथा इससे कैसे बचा जा सकता हैं?

हमे ऊम्मीद है कि यह लेसन आपके लिए उपयोगी साबित होगा और आपके कम्प्युटर तथा अन्य डिजिटल डिवाईस को वायरस से सुरक्षित रखने में काम आएगा.

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