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ऑनलाइन स्टडी क्या है और घर बैठे मोबाइल फोन से ऑनलाइन पढ़ाई/स्टडी कैसे करते है हिंदी में जानकारी

इंसान शुरुआत से ही सीखने के नए-नए रास्ते बनाता आ रहा है. पत्तों से लेकर पत्थर तक और ब्लैक-बोर्ड से लेकर कम्प्यूटर स्क्रीन तक. हमारी ज्ञान पिपासा को पूरी करने के माध्यम बने है.

भगवान बुद्ध के अनुसार यह संसार अनित्य है.

मतलब कुछ भी रहने वाला नहीं है. सबकुछ बदल रहा है, मिट रहा है.

इसी नियम का पालन करते हुए. एजुकेशन इंडस्ट्री (एजुकेशन सेक्टर) भी बदल रही है और अपने आप को डिजिटल बना रही है.

इस काम में 21वीं सदी में सबसे ज्यादा तेजी आई है. और अब एजुकेशन डिजिटल रास्ते पर बढ़ चली है. यानि एजुकेशन अब डिजिटल एजुकेशन हो रही है.

अब आप पूछ सकते है कि असल में यह डिजिटल एजुकेशन होती क्या है? क्या ऑनलाइन स्टडी इसी का रूप है? ऑनलाइन स्टडी हमारे सीखने का तरीका को कैसे प्रभावित करेगी?

इस तरह के ना जाने कितने सवाल मन में आ रहे होंगे?

इसलिए, मैं इस ऑनलाइन स्टडी गाइड में डिजिटल एजुकेशन के बारे में विस्तार से जानकारी दें रहा हूँ. ताकि आपको ऑनलाइन स्टडी के बारे में जानकारी हो सके.

आपकी सुविधा के लिए इस गाइड को निम्न भागों में बांट दिया गया है.   

Table of Content

ऑनलाइन स्टडी क्या है – What is Online Study in Hindi?

इंटरनेट साधनों के द्वारा पढ़ाई करना ऑनलाइन स्टडी कहलाता है. यह डिस्टेंस एजुकेशन (डिस्टेंस लर्निंग) का एक प्रकार है. स्टुडेंट्स तथा टीचर्स एक-दूसरे से बातचीत करने तथा शैक्षिक सामग्री वितरण के लिए इंटरनेट पर निर्भर रहते है. पढ़ाई करने का यह डिजिटल तरीका बहुत लोकप्रिय है.

ऑनलाइन स्टडी की परिभाषा को पढ़ने के बाद आप समझ गए होंगे कि ऑनलाइन स्टडी किसे कहते है?

अगर, सरल शब्दों में कहें तो इंटरनेट के जरिए सीखना या पढ़ना ही ऑनलाइन लर्निंग (ऑनलाइन स्टडी का दूसरा नाम) कहलाता है.  

ऑनलाइन स्टडी को ऑनलाइन लर्निंग, ई-लर्निंग, कम्प्यूटर-आधारित लर्निंग (Computer-Based Learning), वेब-आधारित लर्निंग (Web-Based Learning), इंटरनेट आधारित लर्निंग (Internet-Based Learning), मोबाइल लर्निंग (M-Learning), वर्चुएल लर्निंग आदि अनेक नामों से जाना जाता है.

इस शिक्षा पद्दति के तहत स्टुडेंट्स तथा टीचर्स/ट्रैनर्स का आमना-सामना नहीं होता है. बल्कि, वे अपने-अपने निवास स्थान पर ही रहते है. और वहीं से एक-दूसरे से बातचीत करते है.

शिक्षक, नोटस, लेक्चर आदि को घर बैठे-बैठे ही इंटरनेट साधनों के जरिए स्टुडेंट्स को डिलिवर करते है. स्टुडेंट्स किसी इंटरनेट युक्त डिवाइस के माध्यम से इस स्टडी मैटेरियल्स को एक्सेस करते है.

शंका समाधान के लिए लाइव चैट, ग्रुप डिस्कशन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी तकनिकों का सहारा लिया जाता है. यानि, क्लासरुप जैसा माहौल तैयार रहता है. ये बात अलग है कि वे केवल वर्चुएली ही इंटरेक्शन करते है.  

इस डिजिटल एजुकेशन तकनीक से स्टुडेंट्स तथा टीचर्स [इन्हे मैं Digicher (Digital + Teacher = Digicher) कहता हूँ] दोनों का ही फायदा होता है. दोनों का कीमती समय बचता है. जिसे वे स्टडी करने में इस्तेमाल कर पातें है.

वैसे ऑनलाइन स्टडी के फायदों का जिक्र मैंने नीचे किया है.

ऑनलाइन स्टडी कैसे की जाती है – How to Study Online in Hindi?

Online Padhai Kaise Kare

अब सवाल आता है कि ऑनलाइन लर्निंग कैसे की जाती है? ऑनलाइन लर्निंग के लिए किन-किन टूल्स की आवश्यकता पड़ती है?

इन दोनों सवालों का जवाब निर्भर करता है. पढ़ाई का स्तर और एजुकेशन संस्थान.

  • पढ़ाई का स्तर – इस बात से मेरा मतलब है आप किस स्तर की पढ़ाई करना चाहते है. क्योंकि, हमारी शिक्षा कई स्तरों में विभाजित होती है. जैसे; स्कूल (प्राइमरी, मिडिल, सैकण्डरी), कॉलेज, यूनिवर्सिटी, प्रोफेशनल आदि.
  • एजुकेशन संस्थान – दूसरा आप जिस संस्थान में ऑनलाइन पढ़ाई शुरु करना चाहते है. उसके द्वारा निर्मित कोर्सेस की आवश्यता क्या है? यदि कोर्सेस पारंपरिक एजुकेशन के हैं तो आपको कई प्रकार के टूल्स की जरूरत पड़ सकती है. कौशल सुधारने के लिए विकसित कोर्सेस केवल इंटरनेट युक्त डिवाइस के माध्यम से पूरे किए जा सकते है.

ऑनलाइन स्टडी घर बैठे-बैठे ही होती है. इसके लिए ऑनलाइन क्लासेस अटैंड करनी पड़ती है. जिन्हे एजुकेशन संस्थानों द्वारा होस्ट किया जाता है. स्टुडेंट्स को क्लास के दौरान ही कुछ एक्टिविटिज तथा क्विज्स के माध्यम से परखा जाता है.

यानि, स्टुडेंट्स और अध्यापक अपनी-अपनी जगह से ही इंटरनेट के जरिए एक दूसरे से जुड़े रहते है.

अब सवाल आता है कि ऑनलाइन स्टडी करने के लिए किन-किन टूल्स की जरूरत पड़ती है?

चुंकि, यह गाइड मैं स्टुडेंट्स के लिए लिख रहा हूँ. इसलिए, यहाँ केवल ऑनलाइन एडमिशन से लेकर सर्टिफिकेट लेने तक के लिए आवश्यक टूल्स की जानकारी हैं. कोर्सेस तैयार करने के लिए जरूरी टूल्स को यहां शामिल नहीं किया गया है.

ऑनलाइन क्लास अटैंड करने के लिए आवश्यक टूल्स – Basic Tools to Take Online Classes at Home in Hindi

  • Computer or Laptop
  • Smartphone or Tablet
  • Internet Connection
  • Video Calling & Conferencing Tools
  • Note Taking Apps
  • Digital Literacy Skills

Computer or Laptops

ऑनलाइन क्लास अटैंड करने के लिए यह बेसिक उपकरण है. इसी के जरिए एक स्टुडेंट अपना स्डटी मैटेरियल तथा टीचर से जुड़ पाता है.

इसलिए, एक सस्ता मगर कामचलाउ कम्प्यूटर तो जरूर होना चाहिए. यदि आप ऑनलाइन पढ़ाई करना चाहते है.

इस काम में आपकी मदद करने के लिए इस साइट पर पहले से एक गाइड मौजूद है जो आपको बताती है. नया कम्प्यूटर कैसे खरिदना चाहिए?

पढ़े – नया कम्प्यूटर कैसे खरिदते है?

Smartphone or Tablets

आजकल टेक्नोलॉजी इतनी तेज और उन्नत हो गई है कि जो काम पहले कम्प्यूटर पर होता था. वही काम आज स्मार्टफोन के जरिए किया जा सकता है.

लगभग, सभी ऑनलाइन स्टडी पोर्टल्स का मोबाइल वर्जन या फिर मोबाइल एप मौजूद है. इसलिए, आप स्मार्टफोन या फिर टैबलेट के जरिए भी ऑनलाइन क्लास अटैंड कर सकते है.

आप अपनी पसंद का कोई भी स्मार्टफोन खरिदकर क्लासेस एक्सेस कर सकते है. और गार्डन में जाकर भी पढ़ाई करने का आनंद ले सकते हैं.

मोबाइल फोन की स्क्रीन छोटी होती है. कुछ स्टुडेंट्स के लिए यह दिक्कत दें सकती है. इसलिए, ऐसे स्टुडेंट्स मोबाइल के बजाए कम्प्यूटर अथवा लैपटॉप के जैरिए पढ़ाई करें तो बेहतर होता.

मैं भी सभी स्टुडेंट्स को ऑनलाइन क्लास अटैंड करने के लिए कम्प्यूटर या लैपटॉप की सलाह ही दुंगा. इसका कारण केवल बड़ी स्क्रीन नहीं है. बल्कि, कई और सहुलियते है जो मोबाइल डिवाइस पर पूरी नहीं हो पाती है.

हांलाकि मोबाइल एप्स में हाइलाइट, नोट्स मेकर, बुकमार्क्स, ट्रांसलेट जैसी सुविधाएं दी जाती है. फिर भी, एक कम्प्यूटर में जो खुलापन और सुविधा मिलती है. उसकी बराबरी मोबाइल नहीं कर पाता है.

Internet Connection

Need an Internet Connection to Study Online

आपके पास कम्प्यूटर भी है और स्मार्टफोन भी है. लेकिन, बिना इंटरनेट आप कुछ नहीं कर सकते है.

इसलिए, आपके पास एक एक्टिव इंटरनेट कनेक्शन होना बहुत जरूरी है. अन्यथा आप क्लासेस अटैंड करने से वंचित रह जाएंगे.

मोबाइल में मौजूद इंटरनेट डेटा पैक से भी आपका काम चल जाएगा. जिससे आप कम्प्यूटर में भी नेट एक्सेस कर पाएंगे.

एक बात ध्यान रखें इसका खर्चा आपको ही देना है. टीचर या स्कुल/कॉलेज के भरोसे ना रहें. इसलिए, किफायती तरीके से ही इंटरनेट इस्तेमाल करें. केवल जरुरी वीडियो, ग्राफिक्स ही डाउनलोड करें. फालतू में इंटरनेट और समय खर्च ना करें.

Video Calling & Video Conferencing Tools

ये एप आपको टीचर/ट्रैनर से फेस-टू-फेस बात करने के लिए सुविधा देते हैं. वैसे इनकी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है. लेकिन, लाइव क्लासेस अ‍टैंड करने के लिए वीडियो कॉलिंग एप्स प्राथमिक टूल बन जाते हैं.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप्स के जैरिए लाइव क्लासेस एक्सेस की जाती है. इसलिए, कुछ जरुरी एप्स के नाम नीचे दें रहा हूँ. जिन्हे आप अपने मोबाइल फोन एवं कम्प्यूटर में इंस्टॉल करके रख सकते है. कुछ को वेब ब्राउजर के जरिए भी एक्सेस कर सकते हैं.

  • Zoom
  • Skype
  • Google Hangouts
  • Facebook Live
  • YouTube Live

Note Taking Apps

आप ऑनलाइन क्लास लें रहे है तो आपको नोट्स भी ऑनलाइन ही बनाने पड़ेंगे. इस काम के लिए भी आपको टूल्स की जरूरत पड़ेगी. कुछ स्टुडेंट्स तो पुराने तरीका यानि क्लासरूप स्टडी की भांति ही नोटबुक में नोट्स बनाना पसंद करते हैं.

अगर, आप भी इन्ही में से एक है तो आपको नोट्स मेकर टूल्स की कोई जरूरत नहीं है.

यह टूल्स उन सभी स्टुडेंट्स के लिए है जो ऑनलाइन ही नोट्स बनाना पसंद करेंगे. मैं केवल कुछ ही नाम दें रहा हूँ. आप इंटरनेट पर मौजूद सैंकड़ों एप्स से अपना मनपसंद नोट मेकर टूल ढूंढ़कर इंस्टॉल कर सकते है.

  • Evernote
  • Microsoft OneNote
  • Google Keeps
  • Simplenote

ध्यान दें

कुछ स्मार्टफोन्स में बिल्ट-इन नोट मेकर एप्स आते हैं. आप इसका भी इस्तेमाल नोट बनाने के लिए कर सकते है.

Digital Literacy Skills

आपने सभी टूल्स तो जुटा लिए है. अगर, इनका इस्तेमाल करना ही नहीं आएगा तो ऑनलाइन क्लास अडैंट कैसे करेंगे?

कम्प्यूटर, स्मार्टफोन, सॉफ्टवेयर एवं मोबाइल एप्स का सामान्य उपयोग आना चाहिए. इसी स्किल्स को डिजिटल साक्षरता कहते है. इसलिए, आपको निम्नलिखित काम करने आने चाहिए.

  • कम्प्यूटर स्टार्ट करना, बंद करना
  • फाइल/फोल्डर बनाना, सेव करना
  • सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना
  • इंटरनेट से फाइल डाउनलोड करना/अपलोड करना
  • ईमेल भेजना, जवाब देना
  • प्रिंटर जोड़ना तथा प्रिंट लेना
  • सॉफ्टवेयर्स पर बेसिक काम करना आदि

मेरे हिसाब से यह बेसिक ई-लर्निंग टूल्स से आप बेहतर तरिके से किसी भी ऑनलाइन क्लास को अटैंंड करने के तैयार हो जाते हैं. फिर भी जिस कोर्स को आप कर रहे है. तो उस कोर्सपेज पर मौजूद “आवश्यकता” संबंधी जानकारी पढ़ना ना भूलें.  

डिजिटल साक्षरता से संबंधित कुछ ज्ञान आप इन ट्युटोरियल्स से भी लें सकते हैं.

ऑनलाइन स्टडी के फायदें और नुकसान – Advantages and Disadvantages of Online Learning in Hindi

Advantages or Disadvantages of Online Learning in Hindi

ऑनलाइन लर्निंग अभी नया है. लोगों को समझने में परिचित होने में समय लगेगा. जिससे ई-लर्निंग के प्रति अविश्वास की भावना ज्यादा है.

इसलिए, गूगल पर रोजाना ऑनलाइन स्टडी के फायदें-नुकसान, pros and cons of online study in hindi, merits and demerits of online learning in hindi आदि.

इस तरह के सवाल पूछे जाते है. मगर, मैं आपको बता दूँ. ई-लर्निंग भविष्य है. मेरी बात ध्यान रखना. अभी तो शुरुआत हुई है. इसलिए, माहौल नहीं बना है.

जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी विकसित होगी, लोगों को फायदें नजर आएंगे, सुविधा मिलेगी तो ऑनलाइन लर्निंग पर भरोसा बन जाएगा.

खैर छोड़ो हम बात करते है ऑनलाइन लर्निंग के फायदें क्या है?

ऑनलाइन स्टडी के फायदें – Advantages of Online Learning in Hindi

#1 सुविधाजनक

ऑनलाइन लर्निंग सुविधाजनक है. आप जहां चाहे, जब चाहे अपने हिसाब से सीख सकते है. आपको क्लासरूम लर्निंग की तरह शेड्यूल फॉलो नहीं करना पड़ता है.

जैसा मैंने ऊपर बताया ई-लर्निंग ई-साधनों पर निर्भर है. तो आप इंटरनेट युक्त किसी भी डिवाइस को अपना क्लासरूम बना पाते है. और जो जगह आपको पसंद आए वहीं से क्लास अटैंड करना भी शुरु कर देते है.

वर्चुअल क्लास अटैंड करना लर्नर्स को खूब पसंद आता है. क्योंकि अब वे पॉपकॉर्न खाते-खाते भी क्लास अटैंड कर रहे होते है. 😊

#2 हर समय उपलब्धता

ई-लर्निंग दिन के 24 घंटे सातों दिन साल के 365 दिन उपलब्ध रहती है. यानि 24x7x365 का फॉर्मूला ई-लर्निंग पर लागु होता है. आपकी क्लास हमेशा क्लाउड पर सेव रहती है.

आपने वेबसाइट या एप खोला लॉगिन किया और सीखना चालु. बस इतनाभर ही करना होता है. आंधी-तूफान, बारिश, गर्मी-सर्दी किसी भी मौसम में सीखना बंद नहीं होता है. अगर, कोई पर्व या उत्सव भी आ जाएं तो भी क्लास लगती रहती है. यानि कोई छुट्टी नही, आप ना चाहे तब.

#3 न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता जरूरी नहीं

अधिकतर ऑनलाइन कोर्सेस में एंरॉल करने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता नहीं होती. इसलिए, स्टुडेंट्स अपने मन पसंद कोर्स को कर पाते हैं.

मगर इसके विपरीत क्लासरूम लर्निंग में आपको आगे की क्लास लेने या कोई कोर्स विशेष करने के लिए न्यूनतम शिक्षा पूरी करना अनिवार्य होता है. तभी आप कोर्स में एडमिशन लें पाते हैं.

#4 कोर्सेस की विविधता

ऑनलाइन लर्निंग में कोर्सेस की वैरायटी मिलती है. साइंस से लेकर आर्ट्स तक. सेल्फ इम्प्रूवमेंट से लेकर प्रोफेशनल तक. सब प्रकार के कोर्सेस मिल उपलब्ध होते है.

साथ में यूनिवर्सीटिज द्वारा चलाए जाने वाले परंपरागत कोर्सेस भी मिल जाते है. लेकिन, इनकी संख्या बहुत ही कम होती है. केवल चुनिंदा कोर्सेस ही ऑनलाइन ऑफर किए जाते है.

भारत सरकार द्वारा संचालित स्वयं पोर्टल पर आप सैंकड़ों विषयों पर ऑनलाइन कोर्सेस ढूँढ़ सकते है. इसी तरह Udemy Learning Portal पर आपको करीब 1 लाख से ज्यादा कोर्सेस उपलब्ध है.

इन आँकड़ों से ही आप अंदाजा लगा सकते है कि ऑनलाइन लर्निंग में कितनी विविधता है.  

#5 समय की बचत

ऑनलाइन लर्निंग का सबसे बड़ा फायदा है – समय की बचत. जी हां. इसलिए, मैं खुद ऑनलाइन सीखना पसंद करता हूँ. और लगभग दर्जन भर कोर्सेस कर चुका हूँ.

आपको सुबह-सुबह तैयार होने, नाश्ता करने, बैग तैयार करने जैसे काम नहीं करने पड़ते है. और ना ही पढ़ाई करने के लिए स्कूल/कॉलेज जाना है.

बस लैपटॉप या मोबाइल उठाया और साइट पर लॉगिन करते ही सीखना चालु. इस समय को आप सीखने में लगा पातें हैं और अपने लिए भी कुछ समय निकाल पातें है. जो क्लासरुम स्टडी में बिल्कुल भी संभव नहीं हो पाता.

#6 रोचक एवं नवीन

ई-लर्निग ज्यादा इंटरेक्टिव होती है. यानि लर्नर्स (आप) का जुड़ाव टीचर (Digicher) से क्लासरूम से ज्यादा होता है और आप पहले से अधिक ध्यान से सीखते हैं.

एक ही टॉपिक को आप विभिन प्रकार से समझ पाते हैं. किसी एतिहासिक घटना को फिल्म के माध्यम से दिखाया जाए तो इतिहास को पढ़ना ऊबाता नहीं है.

क्योंकि स्टडी मैटेरियल बुक्स के अलावा, वीडियो सीडी, ओडियो, ग्राफिक्स आदि माध्यमों में उपलब्ध होता है. इसलिए, सीखना ज्यादा रोचक और मजेदार लगता है.

#7 ई-लर्निंग सस्ती है

परंपरागत शिक्षा के मुकाबले ई-लर्निग बहुत ही सस्ती है. आप मात्र 99 रुपए में भी नई स्किल्स सीख सकते हैं. सैंकड़ो फ्री कोर्सेस उपलब्ध है.

यह सस्ती है मगर हल्की नहीं है.

इसे नजरअंदाज ना करें. आप वो स्किल फ्री में सीख जाते है. जो स्किल्स आपको किसी भी परंपरागत संस्थान में पैसों में भी सीखने को नहीं मिलेगी.

कुछ पोर्टल्स पर समय-समय पर डिस्काउंट्स भी ऑफर किए जाते है. तब आप अपन मनपसंद कोर्स बहुत ही सस्ता खरिद सकते हैं.

मैं फिर दोहराता हूँ. सस्ता जानकर इसे नजरअंदाज करने की भूल ना करें.

#8 सभी के लिए अवसर

यह टॉपिक थोड़ा विषय से दूर है. मगर, इसे शामिल करना जरूरी है.

भारतीय संविधान के तहत सभी इंसान समान हैं और उन्हे समान अवसर का अधिकार भी संविधान ने दिया हुआ है.

लेकिन, परंपरागत शैक्षणिक संस्थान अधिकतर अमीर लोगों को ज्यादा तरजीह देते हैं. वहां पर भाई-भतीजावाद चलता है. इसलिए, गरीब तथा प्रतिभावान छात्र अच्छी शिक्षा से वंचित भी रह जाते है.

इस कमी को डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से पूरा किया जा सकता है. क्योंकि, यहां पर आप ना सिर्फ भारत बल्कि विदेशी युनिवर्सीटिज के कोर्सेस भी घर बैठे-बैठे पूरे कर पाते हैं.

जो छात्र सिर्फ पैसों के कारण अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं. उनके लिए ई-लर्निंग एक वरदान है.

#9 अधिक पहुँच

ऑनलाइन स्टडी की पहुँच बहुत ही दूर तक होती है. जहां स्कूल नहीं पहुँच सकते वहां पर पूरी यूनिवर्सिटी पहुँच जाती है.

गांवों, कस्बों, शहरों से लेकर सुदूर पहाड़ी इलाकों तक में ऑनलाइन एजुकेशन की पहुँच होती है. इसलिए, ऑनलाइन लर्निंग की पहुँच क्लासरूम शिक्षा से बहुत ही ज्यादा होती है.

ये कुछ फायदें मुझे ई-लर्निंग के लगते है. यदि आपको लगता है कि कुछ कमी है तो कमेंट के माध्यम से मुझे जरूर बताएं. ताकि यहां उसे जोड़ सकु.

आइए अब ऑनलाइन स्टडी के नुकसान भी जानते हैं.

ऑनलाइन स्टडी के नुकसान – Disadvantages of Online Learning in Hindi

#1 अनुशासन का अभाव  

ऑनलाइन लर्निंग स्टुडेंट्स के अनुशासन को खत्म कर सकती है. क्योंकि, उन्हे रोकने और टोकने वाला कोई नहीं होता है. वे अपनी मर्जी के अनुसार क्लासेस अटैंड करते है.

इसलिए, जिस स्टुडेंट में सेल्फ-डिसिप्लीन की कमी होती है. वह ई-लर्निंग में ज्यादा सफल नही हो पाता है. ई-लर्निंग के लिए बहुत ज्यादा आत्म-प्रेरणा और स्व-अनुशासन की दरकरार होती है. 

#2 हर विषय के अनुकूल नहीं

आप प्रैक्टिकल सब्जेक्ट्स जैसे मेडिकल, ज्योग्राफी, लॉ आदि सब्जेक्ट्स को ऑनलाइन नहीं सीख सकते है. इसके लिए तो आपको मैदान में ही आना पड़ेगा.

इसलिए, ऑनलाइन लर्निंग सीमित है. और कुछ ही सब्जेक्ट्स के अनुकूल है.

#3 तकनीक की जानकारी होनी चाहिए

कहते है कि कोई भी मां के पेट से सीखकर नहीं आता है.

फिर भी ऑनलाइन सीखने के लिए लर्नर्स को कुछ बेसिक टेक्नोलॉजी की जानकारि होना अनिवार्य होता है. तभी वे सफलतापूर्वक ई-लर्निंग का पूरा फायदा लें सकते है.

इसलिए, जो भी स्टुडेंट ऑनलाइन स्टडी करना चाहता है उसे पहले डिजिटल साक्षर बनना पड़ता है. तभी वह ऑनलाइन पढ़ाई कर सकता है.

#4 ट्रैनर से सीधा संपर्क नहीं

ऑनलाइन पढ़ाई आपके मीलों दूर बैठे शिक्षक द्वारा करवाई जाती है. जिनसे आपकी मुलाकात कभी ही नहीं होती है. आप अपने ट्रैनर से कभी भी नहीं मिल पाते है.

व्यक्तिगत मिलाप की कमी इस क्षेत्र में होती है. इसलिए, कुछ स्टुडेंट्स के लिए यह कम लाभदायक साबित होती है.

#5 पढ़ाई का माहौल नहीं

घर बैठकर पढ़ना. मतलब, खुद को घर के किसी कोने में दुबकाए रखना या फिर कमरे में कैद हुए बैठे रहना.

जी हां. आपको ऑनलाइन क्लास अटैंड करते समय एकांत वातावरण की जरूरत रहती है. इसलिए, आप अकेले ही पढ़ पाते है. आपके सहपाठी अपने स्थान से पढ़ रहे होते है. ऑनलाइन स्डटी में क्लासरूम वाला माहौल नहीं मिलता है.

#6 गुणवत्ता का अभाव

अधिकतर ऑनलाइन एजुकेशन पोर्टल निजी है. और लाभ के लिए चलाए जाते है. इसलिए, अधिक से अधिक कोर्स बेचने तथा तैयार करने पर जोर रहता है.

यहां पर पढ़ाने वाले की योग्यता, विशेषज्ञता की परख नही होती है. और जो जानकारी दी जाती है वह भी स्वयं टीचर द्वारा ही भरी जाती है. इसलिए, कम विश्वसनीय होती है.

इसी छूट और कोर्स निर्माण के मानकों का सार्वजनिक प्रकाशन नहीं होने के कारण ई-लर्निंग पर गुणवत्ता का आरोप हमेशा लगता है. जिससे छुटकारा शायद ही मिले.

लेकिन, जितना प्रचार होता है. उससे बहुत ही कम सच्चाई है. ऐसा मेरा मानना है. क्योंकि मैंने ऑनलाइन कोर्सेस करके देखे है. फिर भी मैं यह पूरे विश्वास से नहीं कहुँगा कि ऑनलाइन कोर्सेस क्लासरूम कोर्सेस से बेहतर होते है.

#8 चीटिंग की संभावना

ई-लर्निंग के दौरान स्टुडेंट्स का मूल्यांकन किया जाता है. तब चीटिंग की पूरी संभावना रहती है. ट्रैनर स्टुडेंट्स को चीटिंग करने से नहीं रोक सकते है.

वैसे आजकल बहुत सारे नए टूल्स आ गए है. फिर भी पूरी तरह सुरक्षित होने की गारंटी नहीं ली जा सकती है.

#9 सैद्धातिंक पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान

मैंने ऊपर भी बताया कि ऑनलाइन केवल सैद्धातिंक विषयों को पढ़ाया जाता है. आप पैक्टिकल सब्जेक्ट्स ऑनलाइन नहीं पढ़ सकते है.

प्रैक्टिकल के लिए आपको टूल्स, तथा उपकरणों की जरूरत होती है जिन्हे ऑनलाइन उपलब्ध नहीं करवाया जा सकता है.

#10 स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक

eLearning Effects Health

लगातार मोबाइल या कम्प्यूटर स्क्रीन को देखते रहना आँखों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँच सकता है.

इसके अलावा कमर दर्द, सिर दर्द, तनाव कुछ सामान्य शारीरिक एवं मानसिक समस्याएं जो ऑनलाइन स्टडी के दौरान हो सकती है.

शारीरिक गतिविधि सीमित हो जाने के कारण स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है.

#11 मूल्यांकन की कमी

अधिक से अधिक स्टुडेंट्स को एडमिशन देने के चक्कर में मूल्यांकन सीमित किया जाता है. अगर किया जाता है तो वह भी Quizzes तथा Surveys तक होकर रह जाता है.

इस तरह के मूल्यांकन से आप किसी भी स्टुडेंट्स की लर्निंग की माप नहीं कर सकते है. ऊपर से चीटिंग का डर तो रहता ही है.

#12 सर्वांगीण विकास पर रोक

ऑनलाइन लर्निंग में आप एक ही जगह सिमट कर रह जाते है. इसलिए, कम्यूनिकेशन स्किल्स, नेतृत्व क्षमता जैसे गुण विकसित नहीं हो पाते हैं.

वह रोबोट की भांति एक आज्ञाकारी बालक की तरह विकसित होना शुरु हो जाता है जो केवल दिए गए निर्देशों का पालन करना सीखता है. ई-लर्निंग सर्वांगीण विकास में बाधा तो है.

#13 मान्यता नहीं

जिन कोर्सेस को खुद युनिवर्सिटी या कॉलेज द्वारा ऑफर करवाया जाता है. केवल वही ऑनलाइन कोर्सेस ही जॉब के लिए मान्य होते है. इनके अलावा अन्य कोर्सेस को मान्यता नहीं है.

इसलिए, Accreditation की समस्या ऑनलाइन लर्निंग पोर्टल्स की सबसे बड़ी कमी है. शायद यहीं कारण है कि भारतीय स्टुडेंट्स ई-कोर्सेस से दूरी बनाए रहते है.   

ऑनलाइन स्टडी और स्कूल स्टडी (क्लासरूम स्टडी) में क्या अंतर है – Difference Between Online Study and Classroom Study in Hindi

Online Study vs Classroom Study which in better?
आधारक्लासरूम स्टडीऑनलाइन स्टडी
परिभाषापरंपरागत शिक्षा प्रणाली को ही क्लासरूम स्टडी कहते है.इंटरनेट के द्वारा जो शिक्षा होती है उसे ऑनलाइन स्टडी कहते है.
डिलिवरी रूपक्लासरूम शिक्षा स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों द्वारा प्रदान की जाती है. जिसके लिए इमारत की जरूरत पड़ती है.ई-लर्निंग इंटरनेट साधनों के जरिए डिलिवर होती है. इसलिए, वेबसाइट, एप्स इसके मुख्य साधन होते है. लेकिन, मैसेंजर, ईमेल्स के जरिए भी इसकी डिलिवरी होती है.
मान्यताइसकी मान्यता संबंधित सरकार के शिक्षा विभाग से जरूरी होती है. तभी शिक्षा दी जा सकती है. तथा कुछ प्राथमिक नियम-शर्ते भी पूरी करनी पड़ती है. तभी शिक्षण की मान्यता मिलती है.दूसरी तरफ. ऑनलाइन लर्निंग के लिए किसी मान्यता की जरूरत नहीं पड़ती है. केवल, एक वेबसाइट, एप तथा कोर्स के साथ टीचिंग शुरु हो जाती है.
सब्जेक्ट्सयहां पर सभी सब्जेक्ट्स की पढ़ाई पर कर सकते है.केवल चुनिंद सब्जेक्ट्स ही उपलब्ध होते हैं.
पहुँचपहुँच सीमित होती है स्थान विशेष तक ही स्टुडेंट्स को कवर हो पाते हैं. साथ ही इन्हे अपने क्षेत्र से अलग स्टुडेंट्स को पढ़ाने का अधिकार नहीं होता है.ई-लर्निंग ग्लोबल होती है. यानि जहां इंटरनेट वहां टीचिंग कराई जा सकती है. क्षेत्रीय सीमा ई-लर्निंग पर लागु नहीं होती है. केवल, इंटरनेट ही सीमित कर पाता है.
विश्वसनीयतायह विश्वसनीय तथा भरोसेमंद होती है.इसकी विश्वसनीयता कम होती है.
जॉब की गांरटीक्लासरूम स्टडी की मान्यता होने के कारण जॉब की गांरटी होती है. और एम्प्लोयर इसे मान्य करते हैं.चुंकि इसका रेगुलेशन सरकार के अधीन नहिं होता है. इसलिए, सर्टिफिकेशन की कोई वैल्यू एम्प्लोयर की इच्छा पर निर्भर करती है.
उपलब्धताइसकी उपलब्धता दिन के समय केवल कुछ ही घंटों तक ही होती है.मगर, यह 24 घंटे सातों दिन 365 दिन उपलब्ध रहती है.
विविधतायहां पर आपको सीमित और तय सब्जेक्ट्स ही पढ़ने को ही मिलते हैं. आप अपनी मर्जी से सब्जेक्ट्स नहीं चुन सकते है.लेकिन, ऑनलाइन कोर्सेस की विविधता के कारण आपको लगभग हर टॉपिक पर दर्जनों कोर्स मिल जाते हैं.
लचीलापनयहां पर स्टुडेंट्स को तय कार्यक्रम के अनुसार ही क्लास अटैंड करनी पड़ती है. वे खुद क्लास की टाइमिंग तय नहीं कर सकते. और क्लास लेने के लिए शिक्षण संस्थान में उपस्थिति भी जरूरी होती है.ई-लर्निंग में स्टुडेंट्स अपनी मर्जी के अनुसार क्लास अटैंड करते है. जब चाहे तब, और जहां चाहे वहां से क्लास अटैंड कर पाते है. समय तथा जगह की कोई पाबंदी नहीं होती.

Best Online Study Apps for School and College Students

  • Swayam Portal
  • NPTEL
  • Byju’s
  • Toppr
  • Unacademy
  • Add247
  • Gradeup
  • Meritnation
  • Udemy
  • Coursera
  • Edx
  • Khan Academy
  • Lynda

ऑनलाइन स्टडी से जुड़ी कुछ प्रमुख शब्दावली का अर्थ – Common E-Learning Glossary Meaning in Hindi

Assessment – कोर्स समाप्त होने के बाद स्टुडेंट्स की परफॉर्मेंस को जांचने के लिए परीक्षा लेना.

CBT – इसका पूरा नाम Computer-Based Training होता है. यह ई-लर्निंग का पूराना नाम है.

Certification – कुछ ऑनलाइन लर्निंग पोर्टल्स द्वारा स्टुडेंट्स को ऑफर किए गए कोर्स तय मानकों के आधार पर पूरा करने के बाद प्रमाण-पत्र दिया जाता है. इसे ही सर्टिफिकेशन कहते है.

CBT – इसका पूरा नाम Classroom-Based Training होता है. इस पद्धती में ट्रैनर एक वास्तविक जगह पर ट्रैनिंग देता है.

CMS – इसका पूरा नाम Content Management System होता है. और यह एक सॉफ्टवेयर है.

COD – इसका पूरा नाम Content on Demand होता है. यानि स्टुडेंट्स को उनके द्वारा तय समय पर कंटेट उपलब्ध करवाया जाता है.

Content Library – कुछ पोर्टल्स सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए उपलब्ध सामग्री को एक जगह इकट्ठा कर लेते है. जिसमें वीडीयोज, डॉक्युमेंट्स, फाइल्स, ओडियोज आदि शामिल होते है. इसे ही कंटेट लाइब्रेरी कहा जाता है.

Course Builder – यह एक सॉफ्टवेयर है जो ऑनलाइन कोर्स बनाने के लिए इस्तेमाल होता है.

Course Catalog – किसी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कोर्स कलेक्शन को कोर्स कैटेलॉग कहते है.

eLearning – इसका पूरा नाम Electronic Learning होता है.

F2F – इसका पूरा नाम Face to Face होता है.

FAQ – किसी कोर्स के बारे में आमतौर पर पूछे जाने वाले सवालों को FAQs कहते है. इसका पूरा नाम Frequently Asked Questions होता है.

Feedback – स्टुडेंट्स से कोर्स के बारे में विचार पूछना फीडबैक कहलाता है.

ILD – इसका पूरा नाम Instructor-Led Training होता है. इस प्रकार की ट्रैनिंग किसी वेबिनार या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा व्यक्तिगत रूप से दी जाती है.

Interactive Content – ई-लर्निंग के दौरान स्टडी मैटेरियल को ज्यादा से ज्यादा रुचिकर बनाने के लिए किए जाने वाले अतिरिक्त प्रयासों को इंटरेक्टिव कंटेट कहते है ताकि स्टुडेंट्स का जुड़ाव हो सके.

JILT – इसका पूरा नाम Just-in-Time Learning होता है. यह लर्निंग लर्नर को जरूरत पड़ने पर तुरंत उपलब्ध रहती है. मोबाइल लर्निंग इसका सबसे बड़ा माध्यम है.

Knowledge Base – लर्नर्स के सपोर्ट के लिए प्रकाशित कंटेट को नॉलेज बेस कहते है.

LCMS – इसका पूरा नाम Learning Content Management System होता है. जिसका उपयोग स्टडी मैटेरियल को मैनेज करने के लिए किया जाता है.

L&D – इसका पूरा नाम Learning and Development होता है, जो मानव संसाधन का हिस्सा है. इसके तहत व्यक्ति विशेष के हुनर, ज्ञान तथा कार्यक्षमता को प्रशिक्षण के द्वारा बढ़ाया जाता है.

Learning Path – ऑनलाइन कोर्सेस को एक तय सुधा समय तथा मानकों के आधार पर डिलिवर करना और पूरा करना ही लर्निंग पाथ कहलाता है.

Learning Portal – यह एक वेबसाइट, एप होता है जहां पर ऑनलाइन कोर्सेस ऑफर किए जाते है. इन्हे LMS भी कहते हैं.

LMS – इसका पूरा नाम Learning Management System होता है. यह एक सॉफ्टवेयर होता है जिसका उपयोग ऑनलाइन कोर्सेस को बनाने, प्रबंध करने तथा ट्रैक करने के लिए होता है.

Microlearning – कोर्सेस को व्यक्तिविशेष की जरुरत, उद्देश्य के आधार पर थोड़ा-थोड़ा डिलिवर करने की प्रोसेस ही माइक्रोलर्निंग है.

mLearning – इसका पूरा नाम Mobile Learning होता है. और यह डिस्टेंस लर्निंग का एक प्रकार है. इस ट्रनिंग के लिए स्मार्टफोन एवं टैबलेट्स का उपयोग होता है.

Module – किसी कोर्स में मौजूद स्टडी मैटेरियल का एक भाग. जिसमें कई अन्य भाग भी हो सकते है. यह वीडियो, ओडियो, डॉक्युमेंट्स, ग्राफिक्स आदि से मिलकर बनता है.

MOOC – का पूरा नाम Massive Open Online Course होता है. यह ऑनलाइन कोर्सेस का एक प्रकार है. जिसके तहत भारी संख्या में एडमिशन होता है और वेब पर ओपन एक्सेस संभव होता है.

Navigation – लर्नर द्वारा कोर्स किस तरह एक्सेस किया जाएगा, वह आगे कैसे बढ़ेगा इसका वर्णन ही नेविगेशन कहलाता है. यह वेबसाइट, एप्स के लिए बहुत ही जरूरी होता है.

Objectives – किसी ऑनलाइन कोर्सेस से लर्नर्स क्या सीखेंगे, उन्हे कौनसा हुनर सीखने को मिलेगा आदि बताना ही Objectives कहलाता है.

Online Assessment – लर्नर्स ने क्या सीखा इसकी ऑनलाइन जांच करना ही ऑनलाइन मूल्यांकन है. यह कार्य Quizzes, Surveys, Questionnaires आदि के द्वारा किया जाता है.

Outcomes – यह भी Objectives के समान ही अर्थ देता है. लेकिन, दोनों में एक सूक्ष्म अंतर होता है. Objectives में लर्नर्स से उम्मीद की जाती है कि इस कोर्स को करने के बाद क्या-क्या सीख सकते है. वहीं, Outcomes में टीचर क्या सिखाना चाहता है, सीखने वाले वास्तव में क्या सीखा है. उसका रिकॉर्ड रखा जाता है.

Question Pool – इसे प्रश्न-बैंक भी कहते है. यह उन प्रश्नों का एक समूह है जो किसी परिक्षा या सर्वे को बनाया जा सकता है.

Resources – स्टडी मैटेरियल को ही रिसॉर्स कहते है. जिसे लर्नर्स सीखने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

URL – वेब पता को ही यूआरएल कहते है. https://tutorialpandit.com

स्रोत: Learnupon.com

ऑनलाइन स्टडी से संबंधित कुछ सामान्य सवाल-जवाब – Common FAQs about Online Learning in Hindi?

सवाल #1: ऑनलाइन स्टडी की मान्यता होती है?

जवाब: होती भी है और नही भी होती है.

समझाता हूँ. सभी ऑनलाइन लर्निंग पोर्टल्स को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं होती है. और ना ही इनके सभी कोर्स किसी यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त होते है.

मगर, बहुत सारे ऑनलाइन पोर्ट्ल्स को सरकार तथा यूनिवर्सिटी से मान्यता मिला जाती है. तो उनके ऑनलाइन कोर्स की मान्यता ऑफलाइन कोर्सेस के बराबर ही रहती है.  

लेकिन, जिन पोर्ट्ल्स की मान्यता नही होती है. उनके द्वारा दिए जाने वाले सर्टिफिकेट भी मान्य होते है. मगर, इसकी वैल्यू एम्प्लोयर पर निर्भर करती है.

मैं तो कहुँगा. सिर्फ मान्यता के चक्कर में पड़कर. ऑनलाइन कोर्सेस में एडमिशन लेने से नही कतराना चाहिए. अपनी नॉलेज को बढ़ाने, विशेषज्ञता हासिल करने के लिए ऑनलाइन कोर्सेस में जरूर ही एडमिशन लेना चाहिए.

सवाल #2: मुझे ऑनलाइन स्टडी कहां से करनी चाहिए?

जवाब: आजकल बहुत सारे ऑनलाइन लर्निंग एण्ड टीचिंग पोर्टल मौजूद है. जहां भी आपको मन पसंद कोर्स मिल रहा है वहां से कर सकते है. मैंने कुछ एजुकेशन पोर्ट्ल्स के नाम ऊपर बताएं. इनके अलावा ऑनलाइन सर्च करके भी ढूंढ़ सकते है.

सवाल #3: ऑनलाइन लर्निंग सही है या क्लासरूम लर्निंग?

जवाब: दोनों ही अपनी-अपनी जगह सही है. और दोनों के अपने फायदे-नुकसान है. इसलिए, यह प्रश्न पूछना ही मेरे हिसाब से गलत है.

हमें समय की कद्र करनी चाहिए और बदलते जमाने के साथ ही खुद को भी बदल लेना चाहिए. इसलिए, अब डिजिटल एजुकेशन का जमाना आ गया है तो ऑनलाइन लर्निंग को हाथो-हाथ लेना चाहिए.

सवाल #4: क्या मैं स्कूल/कॉलेज में पढ़ते हुए भी ऑनलाइन कोर्सेस में एडमिशन लें सकता हूँ.

जवाब: बिल्कुल!

आप एक से अधिक ऑनलाइन कोर्सेस में भी एडमिशन लेंगे तो भी कोई परेशानी नहीं होगी. बस आप एक से ज्यादा चीजे सीखने के लिए तैयार रहे.

यदि आप कॉलेज में पढ़ रहे है और उसी विषय पर ऑनलाइन कोर्स भी कर रहे है तो भी कर सकते है. इससे, आपकी उस विषय पर नॉलेज ही बढ़ती है. आपका ही फायदा होगा.

सवाल #5: क्या ऑनलाइन पढ़ाई करने से स्वास्थ्य का नुकसान हो सकता है?

जवाब: आप ऑनलाइन कितना समय दें रहे है. इस बात पर निर्भर करता है.

यदि आप गैप देकर पढ़ाई करेंगे तो कोई नुकसान नहीं होगा. आप ऑनलाइन पढ़ाई करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें तो आपको स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत नहीं आएंगी.

  • अपना बॉडी पॉश्चर सही रखें.
  • कमर सीधी होनी चाहिए.
  • कम्प्यूटर स्क्रीन या मोबाइल स्क्रीन की दूरी आंखों से कम से कम 1 मीटर रखें.
  • एक बार में 60 मिनट से अधिक ना बैठे रहे. बीच-बीच में उठें और चहल कदमी करते रहें.
  • पानी पिते रहे और एकाध फल भी खा लें.

सवाल #6: मैं ऑनलाइन स्टडी करना चाहता हूँ तो मेरा ऑनलाइन एडमिशन कैसे होगा?

जवाब: आप जिस एजुकेशन पोर्टल से ऑनलाइन कोर्स करना चाहते है. उस पोर्टल पर चले जाएं. वहां पर आपको पूरी जानकारी मिल जाती है.

उदाहरण के लिए आप स्वय पोर्टल से किसी कोर्स को करना चाहते है तो पहले आप स्वयं पोर्टल की वेबसाइट पर जाएंगे. वहां पर कोर्स सेलेक्ट करेंगे. फिर अकाउंट बनांगे और आपका एंरॉलमेंट पूरा हो जाएगा.

अधिक जानकारी के लिए आप इस गाइड को पढ़ सकते है.

इसे पढ़े:- स्वयं पोर्टल से ऑनलाइन कोर्स कैसे करें?

इसके अलावा आप अन्य एजुकेशन पोर्टल पर एडमिशन लेने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो कर सकते है.

How to Enroll in an Online Course in Hindi?

Step: #1 – ऑनलान एजुकेशन पोर्टल पर जाएं

Step: #2 – लॉगिन करने के लिए पहले अपना अकाउंट बनाए

Step: #3 – इसके बाद अपना कोर्से सेलेक्ट करें

Step: #4 – अगर फ्री कोर्स है तो Enroll बटन पर क्लिक करें आपका एडमिशन हो जाएगा.

Step: #5 – पैड कोर्से में एडमिशन लेने के लिए पेमेंट बटन पर क्लिक करें और पेमेंट कर दें.

Step: #6 – बधाई हो! आपने सफलतापूर्वक ऑनलाइन कोर्स में एडमिशन ले लिया है.

सवाल #7: क्या ऑनलाइन कोर्सेस का सर्टिफिकेट भी मिलता है?

जवाब: जी हां! लगभग सभी ऑनलाइन लर्निंग पोर्टल सर्टिफिकेट उपलब्ध करवाते हैं. भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालाय तथा भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थानों के सामुहिक प्रयासों से संचालित NPTEL द्वारा जो ऑनलाइन कोर्सेस करवाएं जाते हैं. उनका सर्टिफिकेशन किया जाता है. जो स्टुडेंट्स कि इच्छा पर निर्भर करता है. अगर, लर्नर्स को सर्टिफिकेट चाहिए तो वे तय शुल्क देकर सर्टिफिकेट लें सकते है.

इसी तरह अन्य पोर्टल्स पर भी कोर्स फीस में ही सर्टिफिकेट शामिल होता है. और कुछ अतिरिक्त शुल्क भी लेते है.

सवाल #8: ऑनलाइन क्लासेस भी क्लासरूम क्लास की तरह होती है?

जवाब: नही. पर कुछ ऑनलाइन गतिविधियां इन्हे रेगुलर क्लास के समान बनाती है. जैसे; निश्चित समय पर लेसन पूरा करना, असाइनमेंट्स जमा कराना, गृह-कार्य करना आदि.

सवाल #9: ऑनलाइन लर्निंग ज्यादा सरल होती है. मैंने ऐसा सुना है क्या ये बात सही है?

जवाब: ऐसा कुछ नही है. ऑनलाइन लर्निंग भी क्लासरुम स्टडी के समान ही एक शिक्षण विधि. जिसके आपने नियम-कायदें है. यह तरीका सभी स्टुडेंट्स के लिए कारगर नहीं है. इसके लिए स्टुडेंट्स/टीचर को निम्म कौशल विकसित करना पड़ता है.

  • स्व-अनुशासन
  • समय प्रबंधन की क्षमता
  • डिजिटल साक्षरता
  • उद्देश्य-परक तथा सक्रिय
  • आलस्य नहीं करना

आपने क्या सीखा?

इस ऑनलाइन स्डटी गाइड में मैंने आपको ऑनलाइन लर्निंग के बारे में विस्तार से बताया है कि ऑनलाइन स्टडी क्या होती है, ऑनलाइन स्डटी कैसे की जाती है? ऑनलाइन स्टडी के लिए जरूरी टूल्स कौन-कौनसे होते है.

साथ में ऑनलाइन स्टडी तथा क्लासरूम स्टडी में अंतर भी जाने है. इसके अलावा मैंने ई-लर्निंग शब्दावली (eLearning Glossary in Hindi) के बारे में समझाया है. और स्टुडेंट्स के मन में आने वाले आम सवालों के जवाब देने का प्रयास भी किया है.

मुझे उम्मीद है कि यह ऑनलाइन स्टडी गाइड आपके लिए उपयोगी साबित होगी और आपके ऑनलाइन एजुकेशन से संबंधित ज्ञान को बढ़ाएगी.

आपसे एक निवेदन है इस गाइड को अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें. ताकि उन्हे भी ऑनलाइन लर्निंग के बारे में जानकारी मिले.

#BeDigital

4 Comments

  • nice post – मै आपकी वेबसाइट पर daily विजिट करता हु आप बहुत ही अच्छा लिखते है ….प्लीज आगे भी ऐसे helpful article provide कराते रहेगे !

    • मोहित जी, आपका शुक्रिया. साइट पर आते रहे और नया सीखते रहिए.

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