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Metaverse क्या है जाने इस भविष्य तकनीक की सारी जानकारी

टेक्नोलॉजी की दुनिया में आए दिन कुछ ना कुछ नये आविष्कार होते ही रहते हैं. हाल ही में मेटावर्स (Metaverse) नाम की चर्चा टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हो रही है. सोशल मीडिया भी इसी प्लेटफॉर्म से जुड़ा हुआ है और कुछ समय पहले आपने देखा होगा कि फेसबुक ने अपना नाम बदलकर मेटा कर लिया. लेकिन, फेसबुक ने अपना नाम बदलकर मेटा क्यों किया व मेटावर्स क्या है? यह प्रश्न हम सभी के मन में उठते है.

फेसबुक कंपनी के मालिक मार्क जुकरबर्ग फेसबुक को सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रखना चाहते हैं. वह चाहते हैं कि एक वर्चुअल दुनिया तैयार की जाए और उसमें हम सभी उसी तरीके से रह पाएंगे जैसे रियल वर्ल्ड में रहते हैं. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए फेसबुक के द्वारा 10,000 लोगों को नौकरी देने की घोषणा की गई है, इसके अलावा फेसबुक के द्वारा 50 मिलियन डॉलर का निवेश मेटावर्स कंपनी में किया जाएगा.

तो चलिए अब हम जानते हैं कि आखिर मेटावर्स क्या है, मेटावर्स की दुनिया कैसी होगी व मेटावर्स के लाभ व हानियां क्या है. इसके साथ ही हम आपको मेटावर्स से जुड़ी अन्य जानकारियां भी प्रदान करेंगे. अगर आप नेटवर्क के बारे में सभी जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो लेख को अंत तक जरूर पढ़ें.

मेटावर्स क्या है – Metaverse in Hindi?

Metaverse, एक ऐसी दुनिया है जिसका कोई अंत नहीं है. यानि यह अंतहीन, सीमाओं से परे आभासी दुनिया होगी जो हम इंसानों को असल दुनिया के जैसा जीवन वर्चुएल दुनिया में जीने का मौका देगी. वर्चुएल रियलिटी, ऑग्मेंटेड रियलिटी, मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया, गेमिंग, सोशल लाइफ, दैनिक जीवन का एक मिश्रण है Metaverse.

Metaverse Kya Hai

फेसबुक कंपनी के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के द्वारा एक ऐसा प्लेटफार्म विकसित किया जा रहा है, जो कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एडवांस लेवल में इस्तेमाल करने का अवसर प्रदान करेगा, जहां पर कोई वस्तु नहीं होगी और ना ही हकीकत जैसी कोई चीज होगी लेकिन वो सभी चीजें रियल जैसी होंगी हम सब उसे ऐसा महसूस करेंगे जैसे कि हम अपनी असल जिंदगी में महसूस करते हैं.

सरल भाषा में बताएं तो मेटावर्स के जरिए हम वर्चुअल दुनिया में वो जिंदगी भी जी पाएंगे जो हम असल दुनिया में जीते हैं. मेटावर्स एक तरह की वर्चुअल कम्युनिटी है, जिसके जरिए हम विश्व भर में लोगों से मिल सकते है, एक साथ खा-पी सकते है, एक साथ खेल सकते है और एक साथ काम कर सकते है. ये एक प्रकार की तकनीक है जो  वर्चुअल दुनिया और असल दुनिया के बीच का फर्क बहुत कम कर देगी. ये तकनीक वर्चुअल रियलिटी और ऑग्यूमेंटेड रियलिटी पर आधारित है. 

Metaverse, सपनों की दुनिया हो सकती हैं कहना गलत नही होगा.


मेटावर्स का हिंदी में अर्थ – Metaverse Meaning in Hindi

मेटावर्स दो शब्दों से जुड़कर बना हुआ है Meta+Verse, जहां Meta का मतलब है ‘परे’ (Beyond) और Verse शब्द Universe से लिया गया है. जिसका मतलब है ‘ब्रह्मांड‘ (Universe).

इस तरह से मेटावर्स का हिंदी में अर्थ हुआ ‘ब्रह्मांड से परे’ (Beyond Universe). ये शब्द दिखाता है कि भविष्य में इंटरनेट और उससे जुड़ी चीजें कैसी होने वाली है.

मेटावर्स शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई

नील स्टीफनसन जो अमेरिका के एक साइंस फिक्शन उपन्यासकार है, उन्होंने अपनी नोवेल “Snow Crash” में पहली बार मेटावर्स शब्द का उपयोग किया था. इस नोवेल में उन्होंने दर्शाया था कि कैसे लोग अपनी असल दुनिया से वर्चुअल दुनिया में प्रवेश करते है.

इस नोवेल को 1992 में प्रकाशित किया गया. साइंस फिक्शन से जुड़ी चीजों के बारे में जानने के लिए लोग आज भी इस नोवेल को पढ़ना पसंद करते हैं. इसके साथ ही इस नोवेल में साइंस के अलावा क्रिप्टोकरेंसी, धर्म और फिलॉसफी तथा कंप्यूटर से जुड़ी बातें भी बताई गई है.

फेसबुक का नया नाम क्या है?

मार्क जुकरबर्ग ने 28 अक्टूबर 2021 को फेसबुक को Meta नाम से बदला. यह मेटावर्स के ऊपर कई महीनों से अपनी स्पीच और इंटरव्यू में बता रहे थे कि ये फेसबुक को रीब्रांड करना चाहते है यानि कि फेसबुक को सोशल मीडिया नेटवर्क से बदलकर अलग तरह की कंपनी मेटावर्स कंपनी बनाना चाह रहे हैं.

आपने कुछ समय पहले देखा होगा गूगल ने अल्फाबेट के नाम से अपनी पैरंट कंपनी बनाई थी. ठीक इसी तरह से फेसबुक ने एक पैरंट कंपनी Meta बनायीं है और उसी के अंदर सभी कंपनी जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम काम करेंगी.

मार्क जुकरबर्ग का इस कंपनी को बनाने का एक ही मकसद है कि वे केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं रहना चाहते, वो मेटावर्स की तकनीक जो वर्चुअल रियल्टी पर आधारित है, उसको एक्सप्लोर करना चाहते है.


मेटावर्स हमारे जीवन में कब तक प्रवेश करेगा

मेटावर्स हमारे जीवन में कब तक आ जाएगा अभी इस बात की पुष्टि नहीं की गई है, इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसे बनने में कुछ साल लग सकते हैं. हालांकि, ऑनलाइन खेले जाने वाले गेम्स में ये टेक्नोलॉजी कुछ हद तक आ गई है जो कि काफी नहीं है, मेटावर्स आपके हमारे सोच से परे हैं.

फेसबुक के CEO मार्क जुकरबर्ग ने मेटावर्स को संभव करने के लिए 50 मिलियन डॉलर खर्च करने की बात की है और फेसबुक कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 10 हजार टेक्निकल इंजीनियर को नौकरी पर रखा है.

मेटावर्स दिखने में कैसा रहेगा

मेटावर्स की 3D टेक्नोलॉजी जैसे प्लेटफार्म पर हम अपना खुद का अवतार बना सकेंगे, जो बिल्कुल हमारे जैसा ही दिखेगा और उसमें हमारे जैसे ही फिजिकल अपीरियंस रहेंगे, इसके साथ ही हम अपने बनाए हुए अवतार के जरिए दूसरों के बनाए गए अवतार से वर्चुअली कनेक्ट हो सकेंगे.

मेटावर्स का रूप तो वर्चुअल होगा लेकिन ऐसा प्रतीत होगा जैसे मानो हम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नहीं असल दुनिया में एक साथ एक जगह पर बैठकर गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं.

मेटावर्स की 3D दुनिया कैसी रहेगी

हम सभी ने बॉलीवुड की फिल्म अवतार जरूर देखी होगी, मेटावर्स की 3D दुनिया को अवतार फिल्म में बखूबी दिखाया गया है. इस तकनीक को हकीकत में लाने के लिए बहुत सारे क्षेत्र की कंपनियां जैसे कि हॉस्पिटैलिटी, टेलीकॉम, बैंकिंग, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर आदि कंपनियों को मिलकर एक ईको सिस्टम डिवेलप करना होगा तब जाकर ये तकनीक इस्तेमाल करने योग्य होगी.

मेटावर्स से हमारे जीवन में क्या बदलाव आएगा

आज के समय में देखा जाए तो हर व्यक्ति की जिंदगी साकार रूप से व्यतीत हो रही है. आज मेटावर्स तकनीक को लेकर केवल वर्चुअल दुनिया की कल्पना की जा रही है. इस टेक्नोलॉजी के बारे में बताया जा रहा है कि मनुष्य अपने घर बैठे अपने पसंद की हर एक वस्तु और दुनिया में अपनी पसंद की किसी भी जगह पर जाकर लाइव आनंद उठा पाएगा. 

मेटावर्स को वर्चुअल दुनिया इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसके आने के बाद लोगों के पलक झपकाते ही उनकी मनपसंद चीज उनके सामने मौजूद होगी. आज के दौर में हम इंटरनेट के माध्यम से वीडियो कॉल से ऑनलाइन लाइव शो का लुफ्त उठाते हैं. इस तकनीक के आने के पश्चात हम अलग ही तरीके से अपना जीवन व्यतीत करेंगे.

इस तकनीक के जरिए डिजिटल क्लोथिंग का भी जमाना देखने को मिलेगा, मतलब कि आप फिजिकल रूप से तो अपने घर में ही बैठे होंगे लेकिन डिजिटल उपकरणों की मदद से आपको वर्चुअल दुनिया में घुमाया जाएगा.

वर्तमान समय में इन चीजों के बारे में कल्पना करना थोड़ा सा अटपटा लग रहा होगा लेकिन, ये मुमकिन हो सकता है. जब हमारे बीच इंटरनेट नहीं था तब हमारे लिए यह कल्पना करना भी थोड़ा मुश्किल था कि हम एक देश में बैठकर दूसरे देश के व्यक्ति से बात कर सकते हैं. लेकिन, आज इंटरनेट के जरिए यह सभी चीजें मुमकिन है, तो ठीक इसी तरह से मेटावर्स हमारी जिंदगी में कई तरह के बदलाव लेकर आएगा.

मेटावर्स का एहसास कैसा रहेगा

अगर देखा जाए तो मेटावर्स और कुछ भी नहीं बल्कि सोशल मीडिया का ही एडवांस रूप है. हम सभी इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप सभी सोशल मीडिया नेटवर्किंग वेबसाइट पर क्या करते हैं, एक दूसरे से चैटिंग करते हैं, एक दूसरे को वीडियो कॉल्स करते हैं. हम सभी ने जूम या गूगल मीट पर मीटिंग जरूर की होगी, वहां पर हमें पता होता है कि सामने वाला इंसान कैमरा के उस पार है हमारे पास नहीं है लेकिन मेटावर्स इसी समस्या को दूर करेगा.

हम सभी ने काफी सारी साइंस फिक्शन फिल्में देखी होंगी जहां पर मेटावर्स का ही कांसेप्ट देखने को मिलता है. आने वाले समय में जब मेटावर्स हम सभी के बीच होगा तब हम केवल एक हेडफोन पहनकर वर्चुअल दुनिया में जा पाएंगे.

ये एक तरह की कंप्यूटर-जेनरेटेड दुनिया होगी जहां पर हम अपना रोजमर्रा का काम करेंगे हालांकि कार्य की कुछ सीमाएं भी होंगी हम अपने सगे संबंधियों और दोस्तों के पास होने का अनुभव कर पाएंगे और इसके अलावा एक बंद कमरे में रहकर नई दुनिया में घूमने का एहसास भी करेंगे.

मेटावर्स के रियल लाइफ उदाहरण

अब हम मेटावर्स के कुछ ऐसे उदाहरण जानेंगे जहां पर हमने पहले इस तकनीक का प्रयोग होते हुए देखा है. वर्तमान समय में यह तकनीक ऑनलाइन गेम्स जैसे एपिक और Fortnite गेम्स में प्रयोग की जा रही हैं, जहां पर गेम खेलने वाला व्यक्ति वर्चुअल दुनिया में जाकर गेम खेलता है, हाल ही में एपिक गेम में एक म्यूजिक कंसर्ट का आयोजन करवाया था जिसमें लोगों ने वर्चुअल तरीके से हिस्सा लिया था, मतलब कि लोग अपने ऑफिस और घर में बैठकर हो रहे कॉन्सर्ट का आनंद ले रहे थे.

 रेडी प्लेयर वन जो कि एक बहुत ही चर्चित नोवेल है. इस नोवेल की कहानी में भी मेटावर्स की दुनिया को दर्शाया गया है, इसके अलावा इस नोवेल पर हॉलीवुड फिल्म भी बन चुकी है.

मेटावर्स से क्या कोई खतरा?

बीते कुछ दिनों में प्राइवेसी को लेकर सरकार और फेसबुक/टि्वटर के बीच कई मुद्दे उठे. इस प्रकार वर्चुअल दुनिया की बात आते ही सबसे पहले दिमाग में प्राइवेसी को लेकर कई सवाल आते हैं, हर व्यक्ति अपनी प्राइवेसी को सुरक्षित रखना चाहता है कोई भी व्यक्ति नहीं चाहेगा की कोई दूसरा व्यक्ति उसकी प्राइवेसी का हनन करें.

मेटावर्स वो टेक्नोलॉजी है जहां वर्चुअल और रियल दुनिया के बीच कोई फर्क नहीं रह जाएगा. ऐसे में जानी मानी बात है कि जब इतने व्यापक रूप से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा तो प्राइवेसी का खतरा तो बढ़ेगा ही, कंपनी हमारे निजी बातचीत और निजी डेटा पर नियंत्रण कर सकेगी.


मेटावर्स की विशेषताएं और फायदे

मेटावर्स के हमारे जीवन में आने से उसके कुछ फायदे में मिलेंगे जो कि निम्न प्रकार है:-

  • मेटावर्स के जरिए हम अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ वर्चुअली गेट टुगेदर कर पाएंगे.
  • इसकी मदद से हम किसी भी वर्चुअल कंसर्ट पर जा सकते है, किसी भी तरह की यात्रा कर सकते है, कलाकृति को देख और बना सकते है, इसके अलावा बिजनेस करना व मीटिंग अटेंड करना काफी हद तक आसान हो जाएगा वही इस तरह के काफी काम मेटावर्स के जरिए संभव हो पाएगा.
  • इसकी सहायता से हमें वर्चुअल जिंदगी और असल जिंदगी के बीच का सही अंतर समझ आएगा.
  • मेटावर्स एक तरह से इंटरनेट का अपडेट वर्जन है, इसकी सहायता से हम एक दूसरे से दूर होकर भी वर्चुअल दुनिया में एक दूसरे को छू सकते हैं, महसूस कर सकते हैं, हाथ मिला सकते हैं, जिससे वर्चुअल दुनिया की दूरी असल दुनिया से एकदम खत्म हो जाएगी.
  • इस वर्चुअल टेक्नोलॉजी के जरिए व्यक्ति हर तरह की डिवाइस यहां तक कि घर और गाड़ी जैसी चीजों को भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के द्वारा खरीद सकेगा.

मेटावर्स के नुकसान

जब भी किसी नई टेक्नोलॉजी का आविष्कार होता है, जहाँ हमें इसका भरपूर फायदा होगा वही इसके हानिकारक प्रभाव भी भविष्य मे सामने आएंगे. लोग अपने दिन का अधिकतर समय यही बिताएंगे, वही निजी जिंदगी मे लोगों के बीच दूरियां भी हो जाएगी. इसके अलावा और भी कई खतरनाक प्रभाव देखने को मिलेंगे.

मेटावर्स की चुनौतियां

मेटावर्स का निर्माण करना काफी चुनौतियों से भरा रहेगा. इस तकनीक के लिए जिस प्रकार के बुनियादी ढांचे की जरूरत है वर्तमान समय में वह हमारे पास नहीं है.

आज के समय में इस्तेमाल किया जाने वाला इंटरनेट एक डिजाइन तक ही सीमित है. मेटावर्स के लिए हमें इंटरनेट स्पीड को बढ़ाना होगा. अभी के समय में तेज नेटवर्क के रूप में 4G ही उपलब्ध है, जब लाखों-करोड़ों लोग मेटावर्स एक साथ ऑनलाइन होकर मीटिंग करेंगे या गेम खेलेंगे तो सब कुछ संभालना थोड़ा मुश्किल होगा.

मेटावर्स को बढ़ाने के लिए हमें 6G की आवश्यकता पड़ेगी. इंटरऑपरेबल मेटावर्स के इस्तेमाल करने पर डेटा सेफ्टी से जुड़े सवाल भी उठेंगे. डेटा की सेफ्टी के लिए भी यूजर्स की सहमति की जरूरत पड़ेगी. मेटावर्स को संचार पर नियंत्रण, कर रिपोर्टिंग, नियामक प्रवर्तन, ऑनलाइन कट्टरता की रोकथाम के लिए नए नियमों की जरूरत होगी.

मेटावर्स पर कौन सी कंपनियां काम कर रही है

मेटावर्स एक आभासी दुनिया है, जिसे बनाने के लिए कई टेक्नोलॉजी कंपनियां जैसे Google, Microsoft, NVIDIA, Fortnite, Roblox Crop एक साथ मिलकर इस तकनीक का विकास करने में लगी है. एपिक गेम्स, मेटावर्स के स्थापना के लिए $1 बिलियन खर्च करने का पैसा जोड़ा है.


मेटावर्स से जुडे कुछ साधारण सवाल-जवाब – Metaverse FAQs

सवाल: #1 – फेसबुक का नाम कब बदला गया?

जवाब – 28 अक्टूबर 2021 को फेसबुक का नाम बदला गया.

सवाल: #2 –  मेटावर्स के जरिए हम गेट टुगेदर कर सकेंगे?

जवाब – हां, इस तकनीक के जरिए हम एक दूसरे से दूर होकर भी एक साथ गेट टुगेदर कर सकेंगे.

सवाल: #3 – मेटावर्स 3D टेक्नोलॉजी की तरह ही काम करेगा?

जवाब – हां, मेटावर्स 3D टेक्नोलॉजी की तरह ही काम करेगा.

सवाल: #4 – मेटावर्स में खुद का अवतार बना पाएंगे?

जवाब – हां, मेटावर्स के जरिए खुद का अवतार बनाना संभव होगा.

सवाल: #5 – मेटावर्स शब्द किस नोवेल से लिया गया है?

जवाब – “Snow Crash” नोवेल से लिया गया है.


आपने क्या सीखा?

इस लेख के माध्यम से हमने आपके साथ मेटावर्स क्या है, और उससे जुड़ी सभी जानकारी को साझा किया, उम्मीद करते हैं आपको हमारा लेख पसंद आया होगा इसलिए अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच शेयर करें इसके साथ ही हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं कि आपको यह कैसा लगा.

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