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Virtual Reality (VR) क्या है पूरी जानकारी हिंदी में

किताबों, गेम्स मूवी तथा टीवी शॉ के जरिए एक आभासी दुनिया रची जाती है. जिसे वास्तविक दुनिया से जोडने का भरसक प्रयास किया जाता है.

तकनीक की दुनिया में इस आभासी दुनिया को Virtual Reality के नाम से जाना जाता है. जिसे कम्प्युटर तकनीक के आधार पर निर्मित किया जाता है और इंसान को अवास्तविक संसार का वास्तविक आभास का अनुभव करवाया जाता है.

जानिए आज इस लेख में Virtual Reality Technology (in Hindi) के बारे में पूरी जानकारी. अध्ययन की सुविधा के लिए हमने इस लेख को निम्न बिंदुओं में विभाजित कर दिया है.

Virtual Reality Kya Hai in Hindi
वर्चुअल रियलिटी की जानकारी


Virtual Reality क्या है?

इंसानो को कम्प्युटर तकनीक से निर्मिंत आभासी दुनिया का वास्तविक अनुभव कराना ही Virtual Reality कहलाता है. इस दौरान 3डी ग्राफिक्स तथा सॉफ़्टवेयर एवं हार्डवेयर से वास्तविक वातावरण तैयार किया जाता है. जिसे Virtual Reality Equipment की मदद से अनुभव करवाया जाता हैं.

इस आभासी सच्चाई को हमारा दिमाग पांच इंद्रियों में से आवाज और दृश्य से महसूस ज्यादा करता है. कम्प्युटर तकनीक के द्वारा वास्तविक पर्यावरणीय (स्टिरीयो सराउंड आधारित) आवाजें तथा दृश्य तैयार किये जाते हैं. ताकि इंसानी दिमाग को कल्पित दुनिया का वास्तविक अनुभव करवाया जा सके.

आप किसी पैटिंग, मूवी, किताब के किसी हिस्से में वर्णित दृश्य में शामिल जगह, घटना में आप भी शामिल है. लेकिन, सच्चाई आप जानते ही है?

आभासी दुनिया में इंसान भौतिक और मानसिक रूप से जुड़ जाता है. जिसे वह महसूस करता है, उसमें चल-फिर सकता है और मौजुद आइटमों को देख एवं छू भी सकता हैं. Virtual Reality Equipment को उतारने के बाद वह कल्पित दुनिया से वास्तविक दुनिया में पहुँच जाता है.  


Virtual Reality के विभिन्न प्रकार – Types of Virtual Reality?

Virtual Reality का अनुभव कई प्रकार से होता है. यह पूरी तरह से इस्तेमाल तकनीक पर आधारित दुनिया है. इसलिए जिस प्रकार की हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर तकनीक आभासी दुनिया को बनाने में उपयोग होती है. उसी प्रकार का अनुभव इंसान को होता है.

इस आभासी अनुभव के आधार पर VR Technology के तीन मुख्य प्रकार हैं.

  1. Fully Immersive VR
  2. Semi-Immersive VR
  3. Non-Immersive VR

Fully Immersive Virtual Reality

यह आभासी दुनिया का वास्तविक अनुभव कराने की उच्च तकनीक है. जिसमें HMDs (Head-Mounted Display) तथा मोशन डिटेक्टिंग डिवाइसों के जरिए इंसानी इंदिर्यों को सच्चाई का वास्तविक आभास कराने का प्रयास किया जाता है. इस VR तकनीक में वास्तविक युजर अनुभव का आभास होता है.

Semi-Immersive Virtual Reality

इस आभासी दिनिया में इंसान आंशिक तौर पर आभासी दुनिया का वास्तविक अनुभव कर पाता है. इसे आप विडियों गेम्स तकनीक के समान मान सकते है. इस Virtual Reality को बनाने के लिए High Performance Graphical Computer Systems तथा बड़ी स्क्रीन प्रोजेक्टर या टेलिविजन का इस्तेमाल होता है.

Non-Immersive Virtual Reality

यह वर्चुअल रियलिटी का सबसे कम आभास वाला अनुभव कराने की तकनीक है. जिसका आभास इंसान को किसी High Resolution Monitor के जरिए करवाया जाता है. यह एक 3डी पैटिंग देखने के समान अनुभव होता है.

उपरोक्त आभासी दुनिया के अलावा आजकल Web-Based Virtual Reality भी प्रचलन में है. जिसे VRML (Virtual Reality Markup Language) के द्वारा तैयार किया जाता है. इस तकनीक को कम लागत, कम समय में अधिक लोगों तक अनुभव कराया जा सकता है.

ई-कॉमर्स साईट्स, सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स वेब-आधारित आभासी दुनिया का उपयोग करने लगे है. जिसका अनुभव आपने प्रोडक्ट देखते वक्त किया होगा.


Virtual Reality को अनुभव करने के काम आने वाले उपकरण

वर्चुअल रियलिटी कम्प्युटर-निर्मित आभासी दुनिया है जिसे कुछ खास वर्चुअल रियलिटी उपकरणों (VREs) की मदद से अनुभव करवाया जाता है. इन खास उपकरणों की मदद से हमारा मस्तिष्क आभासी दुनिया को वास्तविक मानकर अनुभव कर पाता है.

HMDs (Head-Mounted Displays)

यह उपकरण एक मोटरबाईक के हेलमेट की भांति होता है. जिसमें दो छोटी स्क्रीन के साथ स्टिरियो स्पीकर लगे रहते है. और बाहरी रोशनी को अंदर आवे से रोकने का पूरा बंदोबस्त किया रहता है. दोनों स्क्रीन 3डी इमेज बनाती है जो युजर के मूवमेंट के हिसाब से अपना आकार-रूप बदलने में सक्षम होती है.

HMDs में बिल्ट-इन एक्सेलरोमीटर या पॉजिशन सेंसर लगे होते है. जो सिर की हलचल को पकड़ते है और आभासी वातावरण को इसी अनुसार अनुकूल होने में मदद करते है.

Immersive Rooms

HMD के अलावा एक आभासी कमरा तैयार किया जाता है. जिसकी दीवारे आंशिक-पारदर्शि होती है जिनके पीछवाड़े से 3डी ग्राफिक्स प्रोजेक्ट होते रहते है. यहाँ पर युजर को हेलमेट नुमा HMD पहनने की जरूरत नहीं पड़ती है. मगर एक 3डी चश्मा जरूर पहनना पड़ता है. Flight Simulation में इस तकनीक का इस्तेमाल करते है.

Datagloves (Input Devices)

ये इनपुट उपकरण कहलाते है. इनकि मदद से युजर को वास्तविक अनुभव कराने में आवश्यक डेटा तथा मदद मिलती है.

डेटाग्लव उपकरण को हाथ में पहना दिया जाता है. जो सेंसर्स युक्त होता है. जैसे ही युजर किसी वस्तु पर अंगुली रखता है या फिर छूता है तो दिए गए दबाव के आधार पर इनपुट निर्मित होता है जिसके अनुसार आभासी-वातावरण अनुकूल होता है. इस डिवाईस में फाईबर-ऑप्टिक केबल का उपयोग होता है.

डेटाग्लव के अलावा जॉयस्टिक, ट्रैकबॉल, ट्रैकपैड्स, बॉडिशूट्स आदि उपकरण भी इस्तेमाल होते है.

इन उपकरणों के अलावा Virtual Reality Technology के आधार पर आभासी वास्तविकता उपकरण भी बदलते रहते है. जिनका काम इनपुट लेना तथा आउटपुट देना और प्राप्त डेटा को प्रोसेस करना ही होता है.


Virtual Reality का उपयोग – Applications of Virtual Reality

Virtual Reality के केवल सपना का अनुभव करने या मनोरंजन देने वाली तकनीक नहीं है जिसका उपयोग हम वास्तविक दुनिया की कई समस्याओं के समाधान खोजने में कर सकते है. और पिछ्ले 20-30 सालों से वैज्ञानिक, डॉक्टर, डेटिंस्ट, इंजिनियर, शिक्षाविद के द्वारा वर्चुअल रियलिटी का उपयोग किया जा रहा है.

Virtual Reality का उपयोग निम्न क्षेत्रों में खूब किया जा सकता हैं.

  • VR in Education
  • VR in Medical
  • VR in Defense
  • VR in Arts & Architecture
  • VR in Entertainment

शिक्षा के क्षेत्र में VR Technology  का उपयोग

  • इस तकनीक का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में कठिन, जटिल और जोखिम भरी विद्याओं को सिखाने में किया जा सकता है.
  • इसका एक उदाहरण Flight Simulation के रूप में मौजूद है.
  • मानव शरीर की जटिल संरचना को समझना
  • किसी पहाड़ की चढ़ाई का प्रशिक्षण देना, हवाई जहाज से छ्लांग, पैराशूट की मदद से उड़ना, तैराकी सीखना, ड्राईविंग का प्रशिक्षण जैसे जोखिम कामों में वीआर तकनीक के लिए अपार संभावनाएं मौजूद है.

चिकित्सा के क्षेत्र में VR Technology का उपयोग

  • ऑपरेशन करना,
  • मस्तिष्क की महिन और जटिल सर्जरी का व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसे जानलेवा और खर्चीले मेडिकल कार्यों का शिक्षण
  • आभासी ऑपरेशन करना (डॉक्टर अपने स्थान पर ही रहता है और ऑपरेशन करने के लिए रोबोट भेजा जाता है जिसे डॉकटर संभालता है)
  • मानसिक डिसऑर्डर पर भी इसका उपयोग करने हेतु शोध जारी है

सैन्य क्षेत्र में VR Technology का उपयोग

  • सेवा और रक्षा कार्यो में इस तकनीक से मानवीय और वित्तिय दोनों बचत संभव है.
  • सैनिकों का वास्तविक युद्धाभ्यास के बजाए आभासी युद्धस्थल पर युद्धाभ्यास करवाना
  • वाहन चलाने की वास्तविक ट्रैनिंग देना
  • हथियार चलाने तथा निशाना साधने के लिए प्रशिक्षण भूमि तैयार करने के लिए

कला और औद्योगिकी डिजाईन तैयार करने में VR Technology का उपयोग

आर्टिस्ट अपनी कलाकृतिया बनाने के लिए इस तकनीक का उपयोग कर रहे है और इंजिनियर्स इमारतों का वास्तविक मॉडल तैयार करके क्लाइंटों को वास्तविकता का आभास करा रहे है.

इसी तरह इंडस्ट्री में भी कार, बाईक तथा अन्य वाहनों का वास्तविक मॉडल तैयार करने में कम लागत के कारण इस तकनीक का उपयोग होना शुरु हो गया है. इस पैटर्न को अन्य इंडस्ट्रीज भी अपने उत्पादों के प्रिटोटाईप तैयार करने में करना शुरु कर चुके है.

मनोरंजन के क्षेत्र में VR Technology का उपयोग

मनोरंजन एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ नए तकनीक का सबसे पहले स्वागत बड़े चाव से स्वीकारा जाता है. वीआर तकनीक का सबसे अधिक उपयोग भी मनोरंजन इडंस्ट्री में ही होता है. 3डी मूवी, शॉ, गेम्स आदि इसके उदाहरण है.

उपरोक्त क्षेत्रों के अलावा वीआर तकनीक अपना दायरा बढ़ाती जा रही है. और नए-नए क्षेत्रों में अपना उपयोग सुनिश्चित कर रही है.


Virtual Technology की चुनौतियाँ

वीआर तकनीक को खुद को साबित करना बाकि है. क्योंकि यह अभी नई तकनीक है. जिसका प्रचार-प्रसार भी अभी सीमित हैं. मगर, इसका उपयोग बहुत समय से किया जा रहा है. इसलिए अभी बहुत सी चुनौतियाँ अपना मूँह उठाए खडी हुई है. जिनका समाधान ढूढ़ना बाकि है.

VR Technology की सबसे बडी चुनौति है स्वास्थय. विभिन्न शोधों और अध्ययनों से पता चला है कि लोगों को कुछ स्वास्थय संबंधी समस्याएं हुई है. जैसे सर दर्द, गर्दन दर्द, तनाव, आंखों में जलन, सूखापन यहाँ तक की कभी-कभी वास्तविक दुनिया के साथ तालमेल भी गड़बड़ाने की बातें लोगों ने कबूल की हैं. जो अपने आप में बहुत बडी पहेली है?


आपने क्या सीखा?

इस लेख में हमने आपको Virtual Reality के बारे में पूरी जानकारी दी है. आपने जाना कि वर्चुअल रियलिटी क्या है? इसके प्रकार और उपकरणों के बारे में भी जाना है. हमे उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा.      

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